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एक मां जो बेटी की मौत के बाद राजनीति में आई, पानीहाटी में 'भावनाओं' का चुनाव, TMC के अभेद्य किले में सेंध लगा पाएंगी रत्ना देबनाथ?

 Published : Apr 09, 2026 06:21 pm IST,  Updated : Apr 09, 2026 06:22 pm IST

पानीहाटी सीट पश्चिम बंगाल की सबसे चर्चित और भावनात्मक ‘बैटलग्राउंड’ बन गई है। यहां स्थानीय समस्याओं के बजाय उस सवाल पर ज्यादा चर्चा हो रही है कि ''आरजी कर पीड़िता के साथ न्याय करने में कौन विफल रहा और अब न्याय कौन दिला सकता है?''

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चुनावी मैदान में उतरीं रत्ना देबनाथ। Image Source : PTI (FILE PHOTO)

कोलकाता: पश्चिम बंगाल कोलकाता के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक युवा डॉक्टर से रेप और हत्या के 20 महीने बाद अब इस घटना की राजनीतिक गूंज पश्चिम बंगाल के चुनावी मैदान में साफ दिखाई दे रही है। इस बार के चुनाव में उत्तर 24 परगना की पानीहाटी सीट पश्चिम बंगाल की सबसे चर्चित और भावनात्मक ‘बैटलग्राउंड’ बन गई है। बता दें कि आज मृतक की मां रत्ना देबनाथ ने बीजेपी के टिकट पर पानीहाटी से अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया और इस दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी मौजूद रहीं।

पानीहाटी पर 'आरजी कर कांड' का साया

पानीहाटी एक ऐसा निर्वाचन क्षेत्र है जहां लगभग 6 दशकों तक सत्ता केवल वामपंथ और कांग्रेस के बीच बदलती रही और बाद में TMC के पास रही लेकिन अब यहां 29 अप्रैल का मुकाबला महज एक सामान्य चुनाव नहीं रह गया है। टीएमसी के गढ़ माने जाने वाले उत्तर कोलकाता के इस उपनगर में स्थानीय समस्याओं के बजाय उस सवाल पर ज्यादा चर्चा हो रही है कि ''आरजी कर पीड़िता के साथ न्याय करने में कौन विफल रहा और अब न्याय कौन दिला सकता है?''

TMC के गढ में पीड़िता की मां की चुनौती

यह सवाल अगस्त 2024 से बंगाल की राजनीति पर असर डालता रहा है। लेकिन बीजेपी द्वारा मृतक डॉक्टर की मां को उम्मीदवार बनाए जाने, TMC द्वारा तीन दशकों में बने अपने मजबूत गढ़ की रक्षा करने और CPI(M) द्वारा उस विरोध आंदोलन को फिर से अपने पक्ष में लेने की कोशिश के बीच पानीहाटी वह सीट बन गई है जहां बंगाल के सबसे भावनात्मक मुद्दे की सबसे कड़ी राजनीतिक परीक्षा होने जा रही है। भाजपा ने मृतक महिला डॉक्टर की मां रत्ना देबनाथ को मैदान में उतारा है। राजनीति में पहली बार कदम रखने वाली रत्ना देबनाथ का मुकाबला टीएमसी के सीनियर नेता और निवर्तमान विधायक निर्मल घोष के बेटे तीर्थंकर घोष से है।

'दर्द की राजनीति नहीं, न्याय की लड़ाई'

पानीहाटी में अब दांव सिर्फ विधानसभा की एक सीट पर नहीं है, बल्कि इस पर भी है कि कौन-सी पार्टी बंगाल के हाल के सबसे बड़े विरोध आंदोलन और उससे जुड़े गुस्से, दुख और अनुत्तरित सवालों पर अपना दावा पेश कर सकती है। भाजपा के लिए यह उम्मीदवारी आरजी कर आंदोलन से पैदा हुए आक्रोश और अविश्वास को तृणमूल के खिलाफ वोट में बदलने की कोशिश है क्योंकि अगस्त 2024 के आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड की गूंज यहां घर-घर में सुनाई दे रही है।

'...तो मेरी बेटी भी खुश होगी'

रत्ना देबनाथ का कहना है, ''अगर मैं लोगों की सेवा कर पाऊं, तो मेरी बेटी भी खुश होगी। मैं चाहती हूं कि पश्चिम बंगाल में कमल खिले और तृणमूल का सफाया हो।'' उनकी राजनीति में एंट्री 9 अगस्त 2024 की उस घटना के लगभग डेढ़ साल बाद हुई है, जिसने बंगाल में बड़ा नागरिक आंदोलन खड़ा किया। देशभर के डॉक्टर, छात्र और आम नागरिक सड़कों पर उतर आए थे। अस्पतालों में हड़ताल हुई। कोलकाता से दिल्ली तक विरोध प्रदर्शन हुए और यह मामला महिलाओं की सुरक्षा तथा सबूतों को नष्ट करने के आरोपों को लेकर राष्ट्रीय मुद्दा बन गया।

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Image Source : X- ANIबीजेपी उम्मीदवार रत्ना देबनाथ

पीड़िता के पिता बोले- राजनीतिक बदलाव से ही मिलेगा न्याय 

मृतका के पिता का कहना है कि उनका परिवार इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि केवल राजनीतिक बदलाव से ही न्याय मिल सकता है। उन्होंने कहा, ''सिर्फ भाजपा ही मेरी बेटी को न्याय दिला सकती है और राज्य की महिलाओं को सुरक्षा दे सकती है। हमने शुरू से कहा था कि हम अपनी बेटी की मौत पर राजनीति नहीं होने देंगे, लेकिन वामपंथ ने विरोध के अलावा किया ही क्या?''  बता दें कि वाम दल ने कलातन दासगुप्ता को उम्मीदवार बनाया है, जो विरोध प्रदर्शनों के प्रमुख चेहरों में से एक रहे हैं।

TMC के सामने गढ़ बचाने की चुनौती

सत्तारूढ़ TMC के लिए यह परीक्षा है कि क्या उसका मजबूत संगठनात्मक ढांचा जनाक्रोश की लहर को झेल पाएगा। तृणमूल ने 2011 से इस सीट पर कब्जा बनाए रखा है। वहीं, CPI(M) के लिए पानीहाटी एक मौका है उस आंदोलन को फिर से अपने पक्ष में लेने का, जिसे वह मानती है कि भाजपा अब हथियाने की कोशिश कर रही है। CPI(M) के कार्यकर्ता और छात्र संगठन के सदस्य इस घटना से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के प्रमुख चेहरे रहे हैं।

क्या कहते हैं आंकड़े?

पानीहाटी कभी वामपंथ का गढ़ था। 1967 में इस सीट के अस्तित्व में आने के बाद CPI(M) ने यहां कई बार जीत दर्ज की, केवल 2 बार कांग्रेस ने बीच में जीत हासिल की। निर्मल घोष ने 1996 में कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी, बाद में वह टीएमसी में शामिल हो गए। इसके बाद 2006 को छोड़कर, उन्होंने 2001, 2011, 2016 और 2021 में लगातार इस सीट पर जीत दर्ज की। इस बार निर्मल घोष ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है और टीएमसी ने उनके बेटे तीर्थंकर घोष को उम्मीदवार बनाया है।

बहरहाल, पानीहाटी सीट पर आंकड़े सत्तारूढ़ पार्टी के पक्ष में नजर आते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र में तृणमूल को लगभग 49.6% वोट मिले, जबकि भाजपा को 34.6% वोट मिले। यहां तक कि 2021 के विधानसभा चुनाव में भी, जब पूरे बंगाल में भाजपा का उभार दिखा, तब भी टीएमसी ने 41% से अधिक वोट लेकर आराम से जीत हासिल की थी। वर्ष 2026 के चुनावी आंकड़ों के अनुसार, पानीहाटी में 1,97,141 वोटर्स हैं। अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी 5% से थोड़ी अधिक है, जबकि मुस्लिम मतदाता 5% से कम हैं, जिससे यह सीट मुख्यतः हिंदू और निम्न-मध्यम व मध्यम वर्गीय उपनगरीय वोटर्स के प्रभाव में है।

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